सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन में शिवभक्ति को उमड़ रहा हैं भक्तों का तांता

श्रावण सोमवार को श्रद्धालुओं ने बनाये  25 पार्थिव शिवलिंग

ललितपुर-सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन में श्रावण सोमवार को भोले के भक्तों ने 25 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया।श्रीरूद्रमहायज्ञ का पंचांग पूजन व पार्थिव शिवलिंग का महारूद्राभिषेक प्रधान यजमान सरदार बी के सिंह,नरेन्द्र कंडकी,लखनलाल रावत,दीपक गुप्ता,नीलेन्द्र पुरोहित व गोल्डी पुरोहित ने किया।महारूद्राभिषेक यज्ञाचार्य पं बाबूलाल द्विवेदी सहित अन्य वैदिक ब्राह्मणों द्धारा संपन्न कराया गया।
तत्पश्चात चंडीपीठाधीश्वराचार्य स्वामी चन्द्रेश्वर गिरि महाराज ने भक्तों को शिव कथा सुनाई। श्रीमद् देवीभागवत महापुराण की कथा सुनाते हुए कथावाचक रिषिकेश शास्त्री ने कहाकि एक बार भगवत्-अनुरागी तथा पुण्यात्मा महर्षियों ने सूतजी महाराज से प्रार्थना की-हे ज्ञानसागर ! आपके श्रीमुख से विष्णु भगवान और भगवान शंकर के दैवीय चरित्र तथा अद्भुत लीलाएं सुनकर हम बहुत सुखी हुए व आत्मिक शांति प्राप्त हुई हैं। ईश्वर में आस्था बढ़ी और ज्ञान प्राप्त किया हैं।अब कृपा कर मानव जाति को समस्त सुखों को उपलब्ध कराने वाले, आत्मिक शक्ति देने वाले तथा भोग और मोक्ष प्रदान कराने वाले पवित्रतम पुराण देवीपुराण का आख्यान सुनाकर अनुगृहीत कीजिए। ज्ञानेच्छु और विनम्र महात्माओं की निष्कपट अभिलाषा जानकर महामुनि सूतजी ने अनुग्रह स्वीकार किया। उन्होंने कहा-जन कल्याण की लालसा से आपने बड़ी सुंदर इच्छा प्रकट की। मैं आप लोगों को उसे सुनाता हूँ। यह सच है कि श्री मद् देवी भागवत् पुराण सभी शास्त्रों तथा धार्मिक ग्रंथों में महान है। इसके सामने बड़े-बड़े तीर्थ और व्रत नगण्य हैं।इस पुराण के सुनने से पाप सूखे वन की भांति जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे मनुष्य को शोक,क्लेश,दु:ख आदि नहीं भोगने पड़ते। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश के सामने अंधकार छंट जाता है, उसी प्रकार भागवत् पुराण के श्रवण से मनुष्य के सभी कष्ट, व्याधियां और संकोच समाप्त हो जाते हैं। महात्माओं ने सूतजी से भागवत् पुराण के संबंध में कई जिज्ञासाएं रखीं। बड़े-बड़े व्रतों, तीर्थ-यात्राओं, बृहद् यज्ञों या तपों से भी वह पुण्य फल प्राप्त नहीं होता जो श्रीमद् देवी भागवत् पुराण के नवाह्र पारायण से प्राप्त होता है।
तथा न गंगा न गया न काशी न नैमिषं न मथुरा न पुष्करम्।
पुनाति सद्य: बदरीवनं नो यथा हि देवीमख एष विप्रा:।इस दौरान कई लोग उपस्थित रहें। गंगा, गया, काशी, नैमिषारण्य, मथुरा, पुष्कर और बदरीवन आदि तीर्थों की यात्रा से भी वह फल प्राप्त नहीं होता, जो नवाह्र पारायण रूप देवी भागवत श्रवण यज्ञ से प्राप्त होता

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